सार
उच्च न्यायालय की न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए याचिकाकर्ता की अनुबंध सेवा अवधि को पेंशन और वार्षिक वेतन वृद्धि में शामिल करने का आदेश दिया है।
विस्तार
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय की न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए याचिकाकर्ता की अनुबंध सेवा अवधि को पेंशन और वार्षिक वेतन वृद्धि के लिए मान्यता देने का आदेश दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ता को छह सप्ताह के भीतर वेतन वृद्धि प्रदान करने का भी निर्देश दिया। न्यायाधीश ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के उन महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख किया, जिनमें सेवाओं को स्थायी नियुक्ति और वार्षिक वेतन वृद्धि के साथ-साथ पेंशन के लिए गिनने का आदेश दिया गया है। याचिकाकर्ता ने अदालत को सूचित किया कि सरकार ने उनकी अनुबंध आधार पर टीजीटी के रूप में सेवाओं को वार्षिक वृद्धि के लिए नहीं गिना है।
सरकार ने सीसीएस पेंशन नियम 1972 के तहत पेंशन की गणना के लिए उनके अनुबंध कार्यकाल को स्वीकार किया, लेकिन अनुबंध अवधि के दौरान अर्जित वार्षिक वेतन वृद्धि देने से मना कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि शीला देवी बनाम हिमाचल प्रदेश मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि संविदा सेवाओं को नियमितीकरण कर स्थायी सेवाओं के लिए गिना जाए। साथ ही अलग-अलग मामलों में संविदा सेवाओं को पेंशन लाभ, वार्षिक वेतन वृद्धि के लिए गिना जाएगा।
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