डी०पी० रावत।
कुल्लू,25 फरवरी।
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू ज़िला के मोहल में एक दिवसीय अभिमुख करण एवं प्रेरणा कार्यक्रम का आयोजन एकीकृत पुनर्वास केंद्र (Integrated Rehabilitation Center for Addict) मोहल, कुल्लू में किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पंजाब नेशनल बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (PNB RSETI) द्वारा चलाए जा रहे कौशल विकास कार्यक्रमों की जानकारी देना था। इस कार्यक्रम में कुल 30 प्रतिभागियों ने भाग लिया । इसका उद्देश्य उन्हें कौशल विकास के अवसरों के बारे में जागरूक करना था ताकि वे पुनर्वास के बाद अपने जीवन को फिर से संवार सकें।
PNB RSETI के सौरभ उपाध्याय ने प्रशिक्षण संस्थान में उपलब्ध विभिन्न कार्यक्रमों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने व्यावसायिक प्रशिक्षण की भूमिका पर जोर देते हुए इसे आत्मनिर्भरता और सतत जीवनयापन के लिए आवश्यक बताया। इसके साथ ही, उन्होंने कानूनी साक्षरता की महत्ता पर भी प्रकाश डाला और उपभोक्ता अधिकारों, वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर सुरक्षा के बारे में जानकारी दी, जो समाज में पुनः एकीकरण के लिए महत्वपूर्ण हैं।
इस सत्र का एक प्रमुख हिस्सा उन प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों पर गहन चर्चा थी, जो आजीविका सृजन और आर्थिक आत्मनिर्भरता पर केंद्रित हैं। श्री उपाध्याय ने बताया कि इन कार्यक्रमों में कृषि, सिलाई, कंप्यूटर साक्षरता, लघु व्यवसाय प्रबंधन और हस्तशिल्प जैसी विभिन्न प्रशिक्षण योजनाएँ शामिल हैं। उन्होंने सरकारी योजनाओं और छोटे एवं मध्यम उद्यमों के लिए बैंकिंग सहायता के बारे में भी जानकारी दी, जिससे प्रतिभागी इन संसाधनों का उपयोग कर आर्थिक रूप से स्वतंत्र बन सकें।
IRCA मोहाल, पुनर्वास प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण भाग के रूप में कौशल विकास प्रशिक्षण को अपनाता है। यह केंद्र विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी एजेंसियों के सहयोग से कौशल विकास कार्यक्रमों का आयोजन करता है, जिससे पुनर्वासित व्यक्तियों को व्यावहारिक कौशल प्राप्त करने और समाज में फिर से जुड़ने में मदद मिलती है। ये पहल उन्हें एक नया उद्देश्य और रोजगार अथवा स्वरोजगार के अवसर प्रदान करती हैं।
काउंसलर नैना देवी ने पुनर्वास प्रक्रिया में कौशल प्रशिक्षण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि IRCA मोहाल नियमित रूप से मरीजों को विभिन्न कौशल विकास गतिविधियों में संलग्न करता है, जिसमें इन-हाउस प्रशिक्षण और समाज कल्याण विभाग तथा स्किल इंडिया कार्यक्रमों के माध्यम से सरकारी सहायता प्राप्त कौशल विकास योजनाओं से जोड़ना शामिल है।
IRCA मोहाल, सामाजिक कल्याण मंत्रालय और हिमाचल प्रदेश सरकार के तहत संचालित होता है और इसे ‘गुंजन संगठन’ द्वारा प्रबंधित किया जाता है। यह केंद्र समग्र पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो न केवल नशामुक्ति बल्कि आर्थिक और सामाजिक पुनर्वास पर भी केंद्रित है।
परियोजना समन्वयक श्री संदीप मिन्हास ने पुनर्वास के समग्र मॉडल के प्रति केंद्र की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने बताया कि पुनर्वास केवल नशे से छुटकारा पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जीवन कौशल, रोजगार के अवसर और आर्थिक स्वतंत्रता भी शामिल हैं। केंद्र सक्रिय रूप से पुनर्वासित व्यक्तियों को कार्यस्थलों, शिक्षा और लघु व्यवसाय पहलों से जोड़ने का कार्य करता है, विशेष रूप से कृषि और बागवानी जैसे क्षेत्रों में, जो कुल्लू जिले में प्रमुख रूप से प्रचलित हैं।
मिन्हास ने पुनर्वास प्रक्रिया में परिवार के सहयोग की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। IRCA मोहाल परिवारों को परामर्श, जागरूकता कार्यक्रमों और मार्गदर्शन सत्रों के माध्यम से निरंतर जोड़ता है ताकि उन्हें एक सहयोगी वातावरण मिल सके। इस तरह के हस्तक्षेप पुनर्वास प्रक्रिया को सफल बनाने और पुनः नशे की लत से बचने में मदद करते हैं।
कार्यक्रम के अंत में एक इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने कौशल विकास, बैंकिंग सुविधाओं और कानूनी मामलों से संबंधित प्रश्न पूछे। कई प्रतिभागियों ने इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल होने में रुचि दिखाई और पुनर्वास के बाद आत्मनिर्भर बनने के लिए इन अवसरों को महत्वपूर्ण बताया।
IRCA मोहाल और PNB RSETI के बीच यह सहयोग पुनर्वासित व्यक्तियों को केवल नशामुक्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और स्थिर भविष्य के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करने का भी एक महत्वपूर्ण प्रयास है। कौशल विकास, वित्तीय साक्षरता और सामाजिक पुनर्वास को बढ़ावा देकर, IRCA मोहाल पुनर्वास प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और यह सुनिश्चित कर रहा है कि प्रत्येक व्यक्ति पुनर्वास के बाद एक उत्पादक जीवन जी सके।
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